Friday, August 29, 2008

आरती गायत्री जी की

जयति जय गायत्री माता, जयति जय गायत्री माता ।

आदि शक्ति तुम अलख निरंजन जग पालन कर्त्री ।

दुःख, शोक, भय, क्लेश, कलह दारिद्रय दैन्य हर्त्री ।।

ब्रहृ रुपिणी, प्रणत पालिनी, जगतधातृ अम्बे ।

भवभयहारी, जनहितकारी, सुखदा जगदम्बे ।।

भयहारिणि भव तारिणि अनघे, अज आनन्द रराशी ।

अविकारी, अघहरी, अविचलित, अमले, अविनाशी ।।

कामधेनु सत् चित् आनन्दा, जय गंगा गीता ।

सविता की शाश्वती शक्ति, तुम सावित्री सीता ।।

ऋग्, यजु, साम, अर्थव, प्रणयिनी, प्रणव महामहिमे ।

कुण्डलिनी सहस्त्रार, सुषुम्ना, शोभा गुण गरिमे ।।

स्वाहा, स्वधा, शची, ब्रहाणी, राधा, रुद्राणी ।

जय सतरुपा, वाणी, विघा, कमला, कल्याणी ।।

जननी हम है दीन, हीन, दुःख, दारिद के घेरे ।

यदपि कुटिल, कपटी कपूत, तऊ बालक है तेरे ।।

स्नेहसनी करुणामयि माता, चरण शरण दीजै ।

बिलख रहे हम शिशु सुत तेरे, दया दृष्टि कीजै ।।

काम, क्रोध, मद, लोभ, दम्भ, दुर्भाव, द्घेष हरिये ।

शुद्घ बुद्घि, निष्पाप हृदय, मन को पवित्र करिये ।।

तुम समर्थ सब भाँति तारिणी, तुष्टि, पुष्टि त्राता ।

सत् मारग पर हमें चलाओ, जो है सुखदाता ।।

जयति जय गायत्री माता, जयति जय गायत्री माता ।।

आरती समाप्त होने पर साष्टांग नमस्कार

ऊँ नमोडस्त्वनन्ताय

सहस्त्रमूर्तये, सहम्त्रपादाक्षिशिरोरुबाहवे । सहस्त्रनाम्ने

पुरुषा शाश्वते, सहस्त्रकोटी युगधारिणे नमः ।।

No comments: