Friday, August 29, 2008

रविवार की आरती

कहुँ लगि आरती दास करेंगे, सकल जगत जाकि जोति विराजे ।। टेक

सात समुद्र जाके चरण बसे, कहा भयो जल कुम्भ भरे हो राम ।

कोटि भानु जाके नख की शोभा, कहा भयो मन्दिर दीप धरे हो राम ।

भार उठारह रोमावलि जाके, कहा भयो शिर पुष्प धरे हो राम ।

छप्पन भोग जाके नितप्रति लागे, कहा भयो नैवेघ धरे हो राम ।

अमित कोटि जाके बाजा बाजे, कहा भयो झनकार करे हो राम ।

चार वेद जाके मुख की शोभा, कहा भयो ब्रहम वेद पढ़े हो राम ।

शिव सनकादिक आदि ब्रहमादिक, नारद मुनि जाको ध्यान धरें हो राम ।

हिम मंदार जाको पवन झकेरिं, कहा भयो शिर चँवर ढुरे हो राम ।

लख चौरासी बन्दे छुड़ाये, केवल हरियश नामदेव गाये ।। हो रामा ।

No comments: