Friday, August 29, 2008

आरती श्री कृष्ण जी की

ओडम् जय श्रीकृष्ण हरे, प्रभु जय श्रीकृष्ण हरे ।

भक्तजनन के दुक सारे पल में दूर करे ।

परमानन्द मुरारी मोहन गिरधारी ।

जय रस रास बिहारी जय जय गिरधारी ।

कर कंकन कटि सोहत कानन में बाला ।

मोर मुकुट पीताम्बर सोहे बनमाला ।

दीन सुदामा तारे दरिद्रों के दुख टारे ।

गज के फन्द छुड़ाए भवसागर तारे ।

हिरण्यकश्यप संहारे नरहरि रुप धरे ।

पाहन से प्रभु प्रगटे जम के बीच परे ।

केशी कंस विदारे नल कूबर तारे ।

दामोदर छवि सुन्दर भगतन के प्यारे ।

काली नाग नथैया नटवर छवि सोहे ।

फन-फन नाचा करते नागन मन मोहे ।

राज्य उग्रसेन पायो माता शोक हरे ।

द्रुपद सुता पत राखी करुणा लाज भरे ।

ओडम् जय श्रीकृष्ण हरे ।





आरती (2)

आरती युगल किशोर की कीजै ।

आरती युगल किशोर की कीजै । राधे तन मन धन न्यौछावर कीजै ।।

रवि शशि कोटि बदन की शोभा । ताहि निरख मेरो मन लोभा ।।

गौर श्याम मुख निरखत रीझै । प्रभु को रुप नय भर पीजै ।।

कंचन थार कपूर की बाती । हरि आए निर्मल भई छाती ।।

फूलन की सेज फूलन की माला । रत्न सिंहासन बैठे नन्दलाला ।।

मोर मुकुट कर मुरली सोहे । कुंज बिहारी गिरिवर धारी ।।

श्री पुरुषोत्तम गिरिवर धारी । आरति करत सकल ब्रज नारी ।।

नंदनंदन वृषभानु किशोरी । परमानन्द स्वामि अविचल जोरी ।।

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