Friday, August 29, 2008

बुधवार की आरती

आरती युगलकिशोर की कीजै । तन मन धन न्यौछावर कीजै ।।

गौरश्याम मुख निरखत रीजै । हरि का स्वरुप नयन भरि पीजै ।।

रवि शशि कोट बदन की शोभा । ताहि निरखि मेरो मन लोभा ।।

ओढ़े नील पीत पट सारी । कुंजबिहारी गिरवरधारी ।।

फूलन की सेज फूलन की माला । रत्न सिंहासन बैठे नन्दलाला ।।

कंचनथार कपूर की बाती । हरि आए निर्मल भई छाती ।।

श्री पुरुषोत्तम गिरिवरधारी । आरती करें सकल ब्रज नारी ।।

नन्दनन्दन बृजभान, किशोरी । परमानन्द स्वामी अविचल जोरी ।।

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